गाथा कोडरमा के चंचला देवी शक्तिपीठ की।

 गाथा कोडरमा के मां चंचला देवी शक्तिपीठ की।

जम्मू द्वीप यानी वर्तमान समय में एशिया महाद्वीप के भारत देश को मंदिरों वाला देश भी कहा जा सकता है क्योंकि भारत देश के हर गांव में कोई ना कोई प्राचीन मंदिर स्थित है। और उन सभी का इतिहास सैकड़ों हजारों साल पुराना हो सकता है। लेकिन झारखंड के उत्तरी छोटा नागपुर के कोडरमा जिले की मां चंचला देवी शक्तिपीठ भारत देश की एकमात्र ऐसी शक्तिपीठ है जिसे देख मनुष्य की इच्छा की तो दूर की बात सिर्फ़ पहाड़ी आदमी के शरीर की पसीना निकल जाती है लेकिन फिर भी भक्त सच्चे लगन से मां चंचल देवी माता की महिमा गाथा गाते-गाते सर्वोच्च शिखर पर चढ़ जाते हैं बच्चे, बूढ़े, युवा, जवान सभी उम्र के लोग जो चल नहीं सकते वह भी चढ़ जाते हैं। इसे झारखण्ड का दूसरा पारसनाथ भी कहा जा सकता है। सत्य जानने से ऐसा लगता है कि 400 मीटर ही पर्वत शृंखला है, लेकिन जब ऊपर पहाड़ी से निचे की ओर अपनी दृष्टि डालने पर ऐसा नजारा देखने को मिलता है कि हम आकाश में पूरी धरती को देखते रहें हैं।

मां चंचला देवी शक्ति पीठ झारखंड के उत्तरी छोटा नागपुर के कोडरमा जिला मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूरी, कोडरमा-गिरिडीह राजमार्ग पर स्थित है।

मां चंचल देवी मां दुर्गा की एक रूप है और मां की सभी भक्त इसी रूप में इस पर्वत श्रृंखला पर स्थापित शक्तिपीठ में पूजा अर्चना करते है। मां चंचला की मंदिर ऊंचे पर्वत के गुफा के भीतर है जहां तक जाने की रास्ता बहुत ही कठिन है गुफा में प्रवेश करना अति संगीर्ण हैं। इस मंदिर में प्रत्येक सोमवार और शनिवार को भक्तों की बड़ी भीड़ उमड़ती है जहां माता रानी की भक्ति अलग-अलग पूजन विधि से माता रानी को भक्त प्रसन्न करते है अपने आप को समर्पित कर देते हैं देखने पर नीचे दाएं ओर भक्तों की एक बड़ी भीड़ नृत्य से माता रानी की तपस्या करती है तो वही मंदिर प्रवेश करने की द्वार की बाई ओर यज्ञ शाला भी है  जहां पर यज्ञ हवन आदि होता है। देखने पर मंदिर पर सिर्फ दुखियारी लोग ही माता के पास पहुंचती है कोई शारीरिक दुखों के कारण कोई मानसिक दुखों के कारण कोई पारिवारिक दुखों के कारण कोई आर्थिक दुखों के कारण इन सभी आदि प्रकार की दुखों की अपार बोझ को लिए माता रानी के पास पहुंचती है जहां माता रानी अपनी भक्तों की उपासना और भक्ति से प्रसन्न अपने सभी भक्तों की दुखों को हर लेती है। इस मां चंचला देवी मंदिर की रास्ता इतना दुर्गम और जटिल व कठिन है कि एक जवान व्यक्ति भी चढ़ने की सोच नहीं सकता लेकिन फिर भी इस कठिन रास्ता वाली पर्वत के ऊपर स्थित मंदिर तक सभी प्रकार के लोग माता रानी की गुणगान करते-करते चढ़ जाते हैं चाहे वह बच्चे हो बूढ़े हो विकलांग हों आदि-आदि सभी प्रकार की लोग मंदिर के उच्चतम शिखर तक चढ़ के अपनी पूजा अर्चना कर आते हैं।

90 के दशक में पुरे क्षेत्र के लोग इस बियाबान जंगल में प्रवेश करने से कतराते थे लेकिन फिर भी मां चंचल देवी की कृपा शक्ति से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर खींच लाती थी। आस्था की प्रतीक, प्राकृतिक धरोहर मां चंचल देवी शक्तिपीठ कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड के चौका गांव में अवस्थित यह शक्तिपीठ गौरव करने वाली ऐतिहासिक धरोहर हैं। माता की मंदिर तक पहुंचाने के लिए पर्वत की सीढ़ियों के माध्यम से कठीन परिश्रम कर चढ़ाई कर जाना पड़ता है, तत्पश्चात मंदिर के गुफा में प्रवेश हों पाती हैं लेकिन फिर भी प्रवेश करना अति चुनौतीपूर्ण हैं फिर भी माता रानी के भक्त गुफा में प्रवेश कर अंदर दीपक जला आते हैं। और मंदिर के सबसे ऊपरी चोटी पर एक लंबी कंदरा हैं जहां स्वयं देवाआदिदेव महादेव विराजमान है वहां तक पहुंचना सभी के लिए काफी चुनौती पूर्ण है फिर भी भक्त भक्ति में मग्न होकर अपनी आराध्य का गुणगान करते हुए पर्वत के उच्चतम शिखर तक चढ़ कर चल ही जाते हैं भक्ति में मग्न लोगों शक्ति को इस पर्वत पर देखने को मिलती है।

इतिहास:डोमचांच, धार्मिक स्थलों से रचा बसा हुआ और पुरानी कथाओं में आज भी अपनी अलग पहचान बनाए रखा है जिले के डोमचांच प्रखंड के साधु संत महात्माओं के साथ साथिया शहीदों की भूमि भी रही हैं। लेकिन यह क्षेत्र महाभारत काल को लेकर भी जाना जाता है, जानकारों की माने तो एक समय महाभारत कालखंड में इस क्षेत्र से पांडव लोग आना-जाना किया करते थे। लेकिन इसके पीछे अवस्थित अर्जुन की कड़ा हमें इतिहास की याद दिलाती है। अति प्राचीन इस जगह से डोमचांच नरेश शीतल बसंत का भी जुड़ाव रहा है। अपने समय में डोमचांच नरेश शीतल बसंत मां चंचल देवी की पूजा अर्चना किया करते थे। आज भी आज भी वर्तमान समय में मां चंचल देवी शक्तिपीठ मंदिर की पूजा अर्चना नित्य दिन डोमचांच के ब्राह्मण समाज के लोग करते हैं।

अंत में यह बड़ी दुख की बात है कि इतनी प्रसिद्ध मां चंचला देवी शक्तिपीठ मंदिर में पेयजल की सुविधा नहीं है। अगर हमरी यह लेख आपकों अच्छी लगीं हों तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

जय हिन्द, वंदे मातरम् , जय माता रानी जय मां चंचला।

लेखक: - कृष्णा कुमार(संपादक NSTB)🖋️

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