कहानी 52 शक्तिपीठों में एक मां तारा शक्तिपीठ की।

 रामपुरहाट के पास स्थापित शक्तिपिठ मां तारापीठ की अमर कहानी।

कहानी 52 शक्तिपीठों में एक मां तारा शक्तिपीठ की।

लेखक:- धनंजय साहा(एक राष्ट्रवादी पत्रकार)🖋️

भारत देश की अगर ऐतिहासिक ग्रंथों खोला जाए तो उनमें सैकड़ो ऐसी आश्चर्यचकित करने वाली घटनाएं मौजूद है जिसे पढ़ने के बाद हमारी रोम-रोम काफ उठती है। वैसे तो हिंदू धर्म में 18 पुराण हैं जो इस प्रकार हैं।

नाम:१. ब्रह्मपुराण, २. पद्मपुराण, ३. विष्णुपुराण, ४. शिवपुराण, ५. भागवतपुराण, ६. भविष्यपुराण, ७. नारदपुराण, ८. मार्कण्डेयपुराण, ९. अग्निपुराण, १०. ब्रह्मवैवर्तपुराण, ११. लिंगपुराण, १२. वाराहपुराण, १३. स्कन्दपुराण, १४. वामनपुराण, १५. कृर्मपुराण, १६. मत्स्यपुराण, १७. गरुडपुराण और १८. ब्रह्माण्डपुराण इनके अलावा हिंदू धर्म में 18 पुराणों का 16 उपपुराण भी हैं। लेकिन 18 पुराणों में एक पुराण जिसे हम शिव पुराण के नाम से जानते हैं उस ऐतिहासिक ग्रंथ के भीतर एक समय एक ऐसी घटना घटी थी जिसे देख काल भी रोया था।

कहानी कुछ इस प्रकार हैं... एक समय की बात है जब भगवान शंकर का विवाह दक्ष प्रजापति की बेटी माता सती से हुई थीं स्थान- दक्षिणेश्वर महादेव मंदिर,वह स्थान आज भी हरिद्वार के दक्षिणेश्वर महादेव मंदिर के नाम से पुरी देश व दुनिया में प्रसिद्ध है। विवाह हो जाने के कुछ समय बाद दक्ष प्रजापति के यहां एक बड़ा यज्ञ आयोजन रखा गया था जिसमें दक्ष प्रजापति ने सभी देवताओं को आमंत्रित किए थे सिर्फ अपनी बेटी माता सती और भगवान शिव को छोड़कर, दक्ष प्रजापति भगवान शंकर को हमेशा अपमान व हीन दृष्टि से देखते थे। सभी देवताओं को यज्ञ की आमंत्रण पूर्ण होने के बाद किसी माध्यम से माता सती को भी अपने पिता दक्ष प्रजापति के यहां की यज्ञ के बारे में पता लग जाती है। तो भगवान शंकर से माता सती द्वारा पूछा जाता हैं? हे भोलेनाथ आप मेरे पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में शामिल होंगे? तो भगवान भोलेनाथ द्वारा जवाब दिया जाता है, कि नहीं देवी? बिन बुलाए मैं कैसे जा सकता हूं।


तब माता सती भगवान शिव को छोड़कर अकेले अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में चली जाती हैं, तो वहां पर पूरी सभा के बीच से दक्ष प्रजापति द्वारा भोलेनाथ के अपमान की ध्वनि माता सती को सुनने को मिलती है। और जब भोलेनाथ का अपमान चरम सीमा को लांग देती है, तभी पूरी सभा के मध्य में स्थापित हवन कुंड में खुदकर माता सती अपनी प्राण त्याग देती है। फिर बाद में पूरी सभा सुन्न पड़ जाने के बाद भगवान भोलेनाथ अपनी पत्नी को ले जानें आते हैं। तो उन्हें अपनी पत्नी की मृत शरीर को देखने को मिलता हैं। दृश्य देख भगवान भोलेनाथ शब्द मुक्त हो जाते हैं। और सिर्फ उनकी आंखों से आंसू ही आंसू गिरने लगते हैं कुछ मान्यताओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ की वह आंसू धरती में जहां-जहां गिरा वह सभी रुद्राक्ष का रूप ले लिया।

अपनी पत्नी माता सती की शरीर को भोलेनाथ अपने बाहों लिए भगवान भोलेनाथ आकाश-आकाश में युगों युगों तक भटकते रहें सृष्टि चक्र की स्थिति बिगड़ने लगी भगवान ब्रह्मा विष्णु भी बड़ी भावुक हो गए और भगवान भोलेनाथ की दशा देख काल भी रो दिए। तभी भगवान विष्णु आकाश में अपने बड़े रूप में आकर सुदर्शन चक्र का आवाहन करके माता सती के ऊपर चक्र छोड़ दिए और सुदर्शन चक्र से माता सती की शरीर की 52 टुकड़ा कर दिए। और माता सती की शरीर का वह 52 अंश धरती के जिस जिस स्थान पर गिरे वह माता सती की शक्तिपीठ कहलाए।


उसी 52 शक्तिपीठों में 51वां शक्तिपीठ मां तारापीठ हैं हिन्दुओं के इस महातीर्थ में माता सती के दाहिनी आंख की पुतली का तारा गिरा था। यही कारण है कि इसका नामकरण तारापीठ के रूप में हुआ। यह तीर्थ स्थल मंदिर बंगाल के वीरभूम जिले में रामपुरहार शहर के नजदीक में स्थापित हैं। जहां रोजाना हजारों भक्तों की भीड़ आती है किसी दिन समय-समय में लाखों की भी भीड़ देखने को मिलती है। मां तारापीठ की इस मन्दिर में पूजा करने के लिए यहां पर पूजा करने के लिए बड़ी-बड़ी लाइनों में घंटों-घंटो तक खड़ा रहना पड़ता हैं।


यहां तक पहुंचने के लिए अगर रेलगाड़ी से आना चाहे तो नजदीकी रेलवे स्टेशन रामपुरहाट में उतरकर टोटो ओटो रिक्शा या प्राइवेट गाड़ियों के माध्यम से आसानी से आया जा सकता है। और हवाई जहाज से आना चाहे तो नजदीकी एयरपोर्ट नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट कोलकाता में उतरकर प्राइवेट गाड़ियों से या रेल के माध्यम से यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

इस मंदिर के बारे में एक बड़ी विशेषता है कि यहां पर जो भी दुखी दुखियारी लोग अपनी माथा टेक लेता है उनकी दुख मां तारा हर लेती है। भक्तों की किसी भी प्रकार की दुख क्यों ना हो शारीरिक, मानसिक, आर्थिक सभी प्रकार की दुखों का निदान मां तारापीठ में होती हैं। आप सभी सच्चे लगन से मन से अपनी माता-पिता के साथ तीर्थ स्थल के भाव से मां तारा को देखने अवश्य आए आपकी जो भी मनोकामना हो मां तारा जरूर पूरी करेगी जय मां तारा।

लेखक:- धनंजय साहा(एक राष्ट्रवादी पत्रकार)🖋️

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