कौन थे, श्री राजीव दीक्षित? स्वदेशी के जनक की अधूरी कहानी।

 स्वदेशी के जनक श्री राजीव दीक्षित जी कौन थे? भारत देश को अपनी सच्ची इतिहास से परिचय कराने वाले महानायक की गाथा°।

लेखक:-धनंजय साहा (एक राष्ट्रवादी पत्रकार) 🖊️

भारत देश की आजादी के आंदोलन में ७(7) लाख ३५(35) हजार क्रांतिकारियों ने अपनी शहादत दी हैं। तत्पश्चात १५(15) अगस्त १९४७(1947) को यह देश फिरंगियों से मुक्त हुआ। लेकिन एक विद्वान,(महापुरुष) हमारे बीच आकर हमें यह एहसास दिलाया। कि इस देश से सिर्फ अंग्रेज ही गया है, अंग्रेजियत नहीं? हमारी भाषा अंग्रेजी, भूसा अंग्रेजी, भजन अंग्रेजी, भोजन अंग्रेजी, चिकित्सा अंग्रेजी, कानून अंग्रेजी, व्यवस्था अंग्रेजी सभी जगह अंगेजी ही अंग्रेजी हैं। हमें इस अंग्रेजीयत से मुक्त होना है।
राजीव दीक्षित जी कहते थे, कि इस देश में राइट टू रिकॉल सिस्टम आनी चाहिए, इस भारत देश की भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए 100₹ से ऊपर के नोट को बंद कर देनी चाहिए। वह कहता था, कि 34,735 कानून जो अंग्रेजों ने इस देश को लूटने और गुलाम बनाने की भाव से बनाया था। वह सभी के सभी कानून खत्म होनी चाहिए। इस महानायक ने करोड़ों भारतीयों को यह याद दिलाया कि एक समय हमें ईस्ट इंडिया कंपनी लुटा था आज 5000 विदेशी कंपनी हमें लूट रहा है। राजीव दीक्षित जी कहते थे, कि अगर इस देश को फिर से सोने की शेर बनाना हैं। तो हमें स्वदेशी नीतियों पर चलना होगा, हमें स्वदेशी अपनाना होगा तभी यह देश बचेगा।

गाथा स्वदेशी के महानायक श्री राजीव दीक्षित जी की...

वर्ष था १९६७(1967), ३०(30) नवंबर के दिन उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की अतरौली तहसील के नाह नाम के गांव में राधेश्याम दीक्षित और मिथिलेश कुमारी के घर एक बालक का जन्म हुआ, जिसे दुनिया आज उन्हें प्यार से राजीव भाई कहते हैं।

अगर बात हो शैक्षणिक योग्यता की तो 12वीं तक की पढ़ाई अपने पिता की नेतृत्व में फिरोजाबाद से पूरा किया, उसके बाद इलाहाबाद IIT से B.tech किया, फिर कानपुर IIT से M.tech पुरी की, उसके बाद फ्रांस से PHD किया।

पेसे से एक भारतीय वैज्ञानिक था। CSIR में काम किया, फ्रांस के टेलीकम्युनिकेशन सेंटर में काम किया, और कुछ समय तक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के साथ भी काम किया। अब इतनी बड़ी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले शख्स, स्वदेशी आंदोलन में आने की कहानी शुरू होती है।... 

२(2) दिसंबर सन् १९८४(1984) को भोपाल के जवाहर नगर में घनी आबादी के बीच भोपाल गैस कांड हुआ। जिसमें एक रात में लगभग २०,००० (20,000) से ज्यादा लोग मारे गए थे, और १० (10) लाख के आसपास लोग इस जहरीली गैस से प्रभावित हुआ। अमेरिका का एक कंपनी यूनियन कार्बाइड अपनी कारखाना को भोपाल के जवाहर नगर में घनी आबादी के बीच कीटनाशक 777 बनाने की उद्देश्य से अपनी कारखाना लगाएं।

लेकिन राजीव दीक्षित जी इस भोपाल गैस कांड पर गहरा शोध कर सच्चाई का उजागर किया कि यूनियन कार्बाइड का यह दुर्घटना(Accident) नहीं एक परीक्षण (Experiment) था। इस प्रशिक्षण में एक कैमिकल का परीक्षण हुआ था जिस कैमिकल का नाम "मिथाइल आइको साइनाइड" थी। बाद में इसी कैमिकल से बम बनकर अमेरिका इराक में गिराए थे, और उसका भी दुष्परिणाम देखा गया। लेकिन भारत सरकार ने यूनियन कार्बाइड कंपनी को भारत से भाग नहीं पाए। क्योंकि भारत सरकार ने इस कंपनी के साथ MOU हस्ताक्षर किए हुए थे। और 500 करोड़ के आसपास का लेनदेन था। लेकिन राजीव दीक्षित और उनके साथियों ने कोर्ट का सहारा लेकर वारंट इशू करवाया और इस कंपनी के खिलाफ में डंडा लेकर निकल पड़ा, ६(6) वर्ष तक घूम घूम कर १०,०००(10,000) गांव को इस कंपनी के खिलाफ में खड़ा कर दिया। और १०,०००(10,000) गांव के लोग पूरी तरह इस कंपनी और इस कंपनी के वस्तुओं का बहिष्कार कर दिया। ६(6) वर्ष बाद यूनियन कार्बाइड कंपनी परेशान होकर इस भारत देश से चले गए। और यहीं से श्री राजीव दीक्षित द्वारा शुरू होती है,...आजादी बचाओ आंदोलन।

श्री राजीव दीक्षित सैकड़ो हजारों लोगों के साथ आजादी बचाओ आंदोलन के माध्यम से पहले एक यूनियन कार्बाइड के खिलाफ में अभियान छेड़ा हुआ था।, लेकिन इस आजादी बचाओ आंदोलन के माध्यम से बाद में पूरे भारत वर्ष में घूम-घूम कर सभी विदेशी कंपनियों के खिलाफ में लोगों को जागरूक करना शुरू किया। और इन कंपनियों की हकीकत को लोगों के सामने लाई, और करोड़ों भारतीयों को एक दिशा प्रदान किया Use स्वदेशी।

लेकिन इसी बीच श्री राजीव दीक्षित का भाग्य उदय हुआ, और उनके गुरु डॉक्टर श्री धर्मपाल के साथ मुलाकात हुई, जो एक बहुत बड़े इतिहासकार थे, और भारत छोड़ो आंदोलन के एक बड़े क्रांतिकारी भी थे। उन्होंने राजीव दीक्षित का मार्गदर्शन किया, और राजीव दीक्षित को बताया कि अगर तुम्हें भारत की सच्चाई जाननी हो तो भारत जिन देशों का गुलाम रहा? उन देश के संग्रहालयों में जाकर भारत के बारे में लिखा गया दस्तावेज को निकालो। तब राजीव दीक्षित जी अपनी शोध के उद्देश्य से यूरोप अलग-अलग देशों में ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमंस, हाउस ऑफ़ लॉर्ड जैसे लाइब्रेरीज में जाकर, पूरी लाइब्रेरीज का चप्पा-चप्पा मारकर भारत के बारे में विदेशी, अंग्रेजों द्वारा लिखी गई दस्तावेज को निकाला। इस तरह फिर पुर्तगाल व डच के संग्रहालयों(Libraries) गए। और उन संग्रहालय्यों से भारत के बारे में राजीव दीक्षित जी को कुल ५०,०००(50,000) पुराने दस्तावेज हाथ लगे। उन सभी दस्तावेजों का पूर्ण अध्ययन कर संपूर्ण शोध कर लेने के बाद अपनी आजादी बचाओ आंदोलन के माध्यम से पूरी भारत में घूम-घूम कर लोगों के बीच जाकर अंग्रेजों द्वारा रचे गए, षडयंत्रों का पर्दाफाश किया और लोगों को आजादी के नाम पर इस सत्ता हस्तांतरण का हकीकत बताया। कि १५(15) अगस्त १९४७(1947) को गोरे अंग्रेजों से हाथों काले अंग्रेजों के हाथों सत्ता हस्तांतरण हुआ आजादी नहीं आई, हम अंग्रेज से मुक्त हुए हैं, अंग्रेजीयत से नहीं? हमें पूर्ण स्वराज नहीं मिला जो हमारे सुभाष चंद्र बोस और सभी क्रांतिकारियों का सपना था। इस तरह राजीव दीक्षित पूरी भारत में घूम-घूम कर स्वदेशी की अलख जगाई, संपूर्ण भारत में स्वदेशी अभियान को देश के कोने-कोने में पहुंचा दी और लोगों को स्वदेशी के महत्व को समझाया कि कैसे अंग्रेजों ने इस विश्व गुरु, सोने की चिड़िया, और सर्वशक्तिमान, भारत देश को बर्बाद कर दिया।

राजीव दीक्षित जी अंग्रेजों के सभी षड्यंत्र को भारत के सभी नागरिकों के सामने प्रस्तुत किया, कि कैसे अंग्रेजों ने हमारी गौ माता की कत्ल शुरू कि था, कैसे अंग्रेजों ने इस देश में शराब लाया। जिससे हमारा धर्म नष्ट हुआ, इतनी अद्भुत हमारी कृषि व्यवस्था नष्ट हुई, सभी भारतीयों को भारत की भारतीय टेक्नोलॉजी से अवगत कराया, और सभी भारतीयों को यह भी बताया कि अंग्रेजों ने हमसे विमान विद्या सीखी, सर्जरी सीखी ,हमसे विज्ञान व वैदिक गणित सीखी, और यह सब सीखकर इस देश के ६(7) लाख ५०(50) हजार गुरुकुलों को बर्बाद कर अपने उधर में ज्ञान के विश्वविद्यालय स्थापित किए। और हमें कॉन्वेंट स्कूल और मैकाले एजुकेशन सिस्टम जैसे कचरा और रद्दी चीजों को देकर चला गया। जिसे आज भी हम भारतीय ढो रहे हैं। राजीव दीक्षित एक तरफ सभी विदेशी कंपनियों को भगाया करता था तो दूसरी ओर भारतीयों को स्वदेशी के प्रति लोगों जगाता था।

और इस तरह राजीव दीक्षित अपनी 20 वर्षों की स्वदेशी अभियान की यात्रा में करोड़ों स्वदेश प्रेमीयों की फौज खड़ा कर दी और अंत में 5 जनवरी 2009 को राजीव दीक्षित और बाबा रामदेव मिलकर भारत स्वाभिमान अभियान का स्थापना किए। और सभी ने यह संकल्प लिया, कि इस भारत को फिर सोने की शेर, सर्वशक्तिमान और विश्व गुरु बनाएंगे, और भारत के गद्दारों ने इस देश के पैसों को विदेशों में काला धन के रूप में जो स्विस बैंक में जमा किए हैं? वह भी हम लोग इस देश में वापस लाएंगे। और इस उद्देश्य के साथ भारत स्वाभिमान के माध्यम से राजीव दीक्षित जी भारत के कोने-कोने में जाना प्रारंभ कर दिए, लगभग ६००(600) जिलों में जाकर लाखों करोड़ों की फौज खड़ा कर दिए थे। और अपने बहुत सारे व्याख्यानों के माध्यम से राजीव दीक्षित जी करोड़ों भारतीयों को भारत का एक ओर काला सच से अवगत कराया जिसे बोलने की साहस कोई भी भारतीय नहीं कर सकता? नहीं तो उसके ऊपर देशद्रोह लग जाता है। राजीव दीक्षित जी ने एक ओर सच सभी के सामने लाई कि हम जो राष्ट्रगान के रूप में जन-गण- मन गान गा रहे हैं, यह गुलामी की गीत है। जिसे रविंद्र नाथ टैगोर ने जॉर्ज पंचम को महान बताने के लिए लिखा था। और 1911 में इंग्लैंड का राजा जॉर्ज पंचम के स्वागत में इस गीत को कोलकाता में गाया गया था। उसके बाद जॉर्ज पंचम खुश होकर रविंद्र नाथ टैगोर को अंग्रेजों ने नोबेल पुरस्कार दिया था। जब भारत गुलाम था, तब अंग्रेज किसी भारतीय को नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत की नहीं करता था? बल्कि सच लिखने वाले पत्रकार और कवियों को काला पानी और फांसी की सजा दी जाती थीं, उन लोगों के हाथ काट दिए जाते थे। दुर्भाग्य से अंग्रेजों की चाटुकारिता बस रविंद्र नाथ टैगोर को यह नोबेल पुरस्कार मिला और फिर बाद में ओर एक दुर्भाग्य से नरम दल के लोगों ने इस जन-गण-मन गीत को राष्ट्रीय गान घोषित कर दिया। लेकिन देश के लाखों क्रांतिकारियों की आत्माओं को रोना पड़ा होगा, कि हम जिस गीत को गाकर सूली पर चढ़ गए, लेकिन  उस वंदे मातरम् गीत के जगह हमारे अपने भारतीय लोग जन-गण-मन गा रहे हैं। जिस गीत को गाकर हमारे क्रांतिकारी फांसी पर चढ़ गया, वह वंदे मातरम् गीत दुर्भाग्य से आजादी के ५०(50) वर्ष बाद, वंदे मातरम् गीत को राष्ट्रगीत का दर्जा मिला। लेकिन आज भी स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस हो किसी भी राष्ट्रीय त्योहार पर वंदे मातरम् को गाया नहीं जाता हैं। तो राजीव दीक्षित कहते थे कि भारत का राष्ट्रीय गीत जन-गण-मन नहीं? वंदे मातरम होनी चाहिए। और स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी भारतीयों को वंदे मातरम् गानी चाहिए। जिस गीत को गाते गाते हमारे क्रांतिकारियों ने सूली पर चढ़ गए थे। 

राजीव दीक्षित का एक और महत्वपूर्ण व्याख्यान है, जिसे हमें इस लेख में डालने को विवश होना पड़ा? करोड़ों रुपया लेकर कथावाचक रामायण पाठ करने की दौर में राजीव दीक्षित जी ने भारत के वर्तमान सभी समस्याओं का हल रामायण से खोज निकाला। वर्तमान भारत की सभी समस्याओं का हल रामायण में मौजूद हैं। इसीलिए महात्मा गांधी अक्सर कहते थे, कि रामराज आनी चाहिए।

आप सभी राजीव दीक्षित जी के उस रामायण व्याख्यान को जरूर सुने नीचे लिंक डाल दिया जा रहा हैं।

https://youtu.be/z_IrkVjdTXo?si=XTmcJXza5h6V12jU

अब देश के गद्दार परेशान, विदेशी कंपनी परेशान, काला धन के मालिक परेशान, राजनीतिक पार्टी भी परेशान, क्योंकि राजीव दीक्षित जी अपने मंच से हर समय यह कहते थे, कि यह सभी पार्टिया एक काला नाग हैं? तो दूसरा करेत हैं। सभी पार्टी मिलकर इस देश को डसने में लगा है, भारत देश को खोखला करने में लगा है।

अब यह सवाल निकाल कर आता हैं भला ऐसे व्यक्ति से कौन परेशान नहीं होगा? और उस समय बाबा रामदेव भी अपने से ज्यादा राजीव दीक्षित की लोकप्रियता देखकर घबरा गए और एक षड्यंत्र रचा गया? जिसमें राजीव दीक्षित जी छत्तीसगढ़ के दुर्घ में भारतीय स्वाभिमान की व्याख्यान करने गए हुए थे। व्याख्यान पूर्ण होने के बाद छत्तीसगढ़ के भिलाई के नजदीक रास्ते में ही एक दिल का दौरा आया? और राजीव दीक्षित जी को अस्पताल लेकर जाया गया। लेकिन कुछ घंटों का इलाज चला?  और डॉक्टरों राजीव दीक्षित को मृत घोषित कर दिया। लेकिन राजीव दीक्षित की ऐसी मृत्यु की कोई कल्पना भी नहीं की थी। कि जिस व्यक्ति को 21 वर्ष तक एक बुखार, सर्दी तक नहीं आया उस व्यक्ति को ऐसी आकस्मिक मृत्यु कैसे हुई? यह देश के लिए बहुत बड़ी दुर्भाग्य होगा की आजाद भारत का इकलौता क्रांतिकारी व स्वदेशी के जनक श्री राजीव दीक्षित जी की मृत्यु और हत्या के षड्यंत्र को नेशनल मीडिया ने दिखाया नहीं?

इसीलिए ३०(30) नवंबर २०१०(2010) की उस दिन की घटना से हमारी टीम ने एक सीख ली हैं कि वर्तमान नेशनल मीडिया देश के असली हीरो हिरोइन (भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई, नीरा आर्य , बाल गंगाधर तिलक, राजीव दीक्षित आदि) का प्रचार के लिए नहीं है? बल्कि देश के नकली हीरो हिरोइन(शाहरुख खान,सलमान खान, करीना कपूर, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार आदि) का प्रचार के लिए है। इसीलिए द NSTB की टीम भारत देश व मीडिया जगत का इकलौता कार्यक्रम का शुभारंभ किया हैं। जो क्रांतिकारीयों और राष्ट्र के नाम समर्पित हैं। उस कार्यक्रम का नाम हैं, "इंडिया से भारत की ओर" जिसका उद्देश्य वर्तमान इंडिया विचारधारा के देश को भारत की मानसिकता वाला देश बनाना हैं। जो हमारे क्रांतिकारियों का सपना था। पूर्ण स्वराज, स्वदेशीमय भारत, इसी उद्देश्य के साथ "इंडिया से भारत की ओर" कार्यक्रम देश के कोने-कोने में घूम कर छोटे-छोटे नगरों से लेकर बड़े-बड़े महानगरों में जाकर क्रांतिकारियों की त्याग बलिदान उसकी शौर्य गाथा और अमर गाथा को जन-जन तक बताएंगे। ताकि भगत सिंह महात्मा गांधी राजीव दीक्षित जैसे सैकड़ो क्रांतिकारी फिर से इस देश को पूर्ण स्वराज देने के लिए जन्म ले। इसीलिए आप सभी "इंडिया से भारत की ओर" कार्यक्रम को ज्यादा से सहयोग कीजिए और कुछ दान देकर एक भारतीय होने कर्तव्य का निर्वहन कीजिए।

३०(30) नवंबर २०१०(2010) को राजीव दीक्षित की हुई मृत्यु कोई साधारण मृत्यु नहीं थी? एक बहुत बड़ा षड्यंत्र था? लेकिन बाद में सभी को पता चला कि यह सब एक भयानक षड्यंत्र था? राजीव दीक्षित की मृत्यु होने के बाद राजीव दीक्षित की उनकी पूरी शरीर नीली पड़ गई थीं।, राजीव समर्थकों का मानना है। कि उन्हें जहर(Poison) देकर मारा गया है? और धीरे-धीरे षडयंत्रों का खुलासा होने लगा, और फिर बाबा रामदेव के उटपटांग बयान कि राजीव दीक्षित को शुगर था, बीपी की बीमारी थी, रामदेव द्वारा अस्पताल में 25 लाख का खर्च, इस तरह के गलत बयान से पुरितया यह सिद्ध होती है?, कि राजीव दीक्षित जी की मृत्यु नहीं हत्या हुई हैं? और देश के करोड़ों राजीव दीक्षित के समर्थक आज भी या मांग कर रहा है? कि राजीव दीक्षित की हत्या ऊपर CBI जांच हो? तभी सच्चाई इस देश के सामने आएगी। कि किन गद्दारों ने मिलकर राजीव दीक्षित का हत्या किए हैं। राजीव दीक्षित कोई एक नाम नहीं, भारत देश का सरताज था। वह अरबों लोगों में एक भगवान द्वारा भेजा गया एक दूत था। वह स्वदेशी के जनक,महानायक थे, वह एक महान वैज्ञानिक थे, आयुर्वेद के महान विद्वान्व व ज्ञाता थे। इतनी बड़ी हस्ती की हत्या कोई साधारण बात नहीं सकती? इसीलिए CBI जांच होनी चाहिए?

According to Rajiv Dixit's lecture and facts available on social media.

अंत में एक लाइन राजीव दीक्षित जी को जिन गद्दारों ने मारने की कोशिश किया की इन्हें मार देंगे? तो यह हमेशा के लिए मर जाएंगे। लेकिन बिल्कुल उल्टा हुआ। राजीव दीक्षित जी हमेशा के लिए मरे नहीं? हमेशा के लिए जी गए। वह हमेशा के लिए अमर हो गए। राजीव दीक्षित जी की शरीर दाह के बाद राजीव दीक्षित जी मरे नहीं वह और जी गए करोड़ों भारतीयों के दिलों में एक चिंगारी बन गए।, दिन प्रतिदिन उनके समर्थक व लोकप्रियता बढ़ते ही जा रहा है।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता है। जो राजीव दीक्षित के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठता है।

कलम आज उनकी जय बोल, 

जला अस्थियां अपनी सारी, 

छिटकाई जिसने चिंगारी, 

जो चढ़ गए पुण्य वेदी पर, 

लिए बिना गर्दन का मोल। 

जलकर बुझ गए एक दिन,

मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल, 

कलम आज उनकी जय बोल। 

यह कविता हमें सिखाती है कि जो हमारे लिए जले, तपे और काल की अन्धकार में समा गए। वह भी हमारे लिए पूजनीय है, वंदनीय है। इसीलिए हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी। कि जो व्यक्ति अपने जीवन के जितने वर्ष जिए, स्वदेशी के जिए तो हम हम उसे महापुरुष के लिए, और देश को महान बनाने के लिए स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर स्वदेशी अपनाकर, और उनके दिए हुए मार्ग पर चलकर इस देश को महान, विश्व गुरु, सर्वशक्तिमान, सोने की शेर बनाकर, उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। हम सभी भारतीय का कर्तव्य बनता है कि हम मातृभूमि के लिए कुछ करें, क्योंकि भगवान राम ने इसी भारत की माटी के लिए सोने की लंका त्याग दिया था यह कहकर की जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात- माता और मातृभूमि हमारे लिए स्वर्ग से भी बढ़कर है। इसीलिए आप सभी स्वदेशी अपनाइए और स्वदेशी अपनाकर राजीव दीक्षित को सच्ची श्रद्धांजलि देकर एक भारतीय होने की कर्तव्य पूरी कीजिए। राजीव जी ३०(30) नवंबर को आए धरती पर आए थे, ओर ३०(30) नवंबर को ही चले गए, मां भारती के गोद में सो गए। जो व्यक्ति पूरी जीवन स्वदेशी के लिए जिए थे। इसलिए भारत सरकार को ३०(30) नवंबर दिन को दीक्षित जयंती घोषित करनी चाहिए, यही राजीव समर्थकों की मांग हैं। द NSTB की टीम राजीव दीक्षित को कोटि-कोटि नमन करता है, वंदन करता है, राजीव भाई आप हमेशा के लिए सितारों की तरह चमकते रहेंगे आप व्यक्ति नहीं आप एक विचार हैं। धन्यवाद, जय हिंद, वंदे मातरम जय मां भारती।🙏

लेखक:- धनंजय साहा,(एक राष्ट्रवादी पत्रकार ✍🏼)

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